कबीर की सामजिकता

  • नीरजा सिंह

Abstract

कबीर के समय की धार्मिक और सामाजिक परिस्थितियां बहुत विचित्र थी  व  नित नवीन रूप धारण कर रही थी उस समय हिंदू , जैन, नाथ, मुसलमान जैसे विभिन्न धर्म मत पंथ प्रचलित थे और साथ ही साथ लोगों के बीच भी छोटे-छोटे संप्रदायों का विकास हो रहा था | जिसके कारण आडंबरों, रूढ़ियों, अंधविश्वास और पाखंड को आश्रय   मिल  रहा था व समाज में इनका बोलबाला होने लगा था | द्विवेदी जी कहते हैं कि “कबीर मुसलमान होकर भी असल में मुसलमान नहीं थे योगी होकर भी योगी नहीं थे वह कुछ भगवान की ओर से ही सबसे न्यारे बनाकर भेजे गए थे
Published
2017-03-16