तेरे सीने में ज़ली कहीं आग़ है

  • Ms आरती

Abstract

तेरे सीने में ज़ली कहीं आग़ है  ।

फ़िर क्यूँ तू अब-तक चुपचाप है  ।।

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सत्य, अहिंसा, त्याग, नहीं आसान  ।

फ़िर क्यूँ तेरा ये संस्कार है  ।।  
Published
2017-03-10