आदमी का मूल्य
Abstract
आदमी का मूल्य घाट गया है भाव डूब गया है भौतिकता के भंवर में नैतिकता का नाव छुट गया है मानवता का पतवार बैठा 'साहिल' सोच रहा है क्या ठहर गया सागर विकास का या बदल गया संसार खुद ही बना ली है अपनी क्या हालत गते है एक दुसरे का कीमत क्या यही है हकीकत सुना है खबर आई है
बस सौ रुपये है आदमी की कीमतक्या भूल गया है तिकतावादी
आस्सी रुपये है एक गोली की कीमत तो कितना हुआ फायदा
मरने से आदमी को केवल बीस रुपये ए खुदा का नेक बंदा
थोरा और ज्यादा ले ले मुनाफा कर दे मनुष्य के मूल्य में
थोरा सा इजाफा!



