आज महीनों बाद

  • गिरिजा देवी

Abstract

आज महीनों बाद गुजरा उस गली से जहा मिली थी वो हशीन खिली थी प्यार की कलि आने लगी बीती बातें याद खो गया मई यादों में तभी आई वो नजर घर के बरामदे में मिला दिल को करार और सांसों को सुकून आँखों के रस्ते दिल में उतरके फिर से शुरू होने लगी यादों का  हलचले थी दूरियां दरमियाँ हमारे यादों के लहरे छूने लगी किनारे दिल ही जाने दिल के इशारे और आचनक चाचाजी गुजरे उसी रस्ते से और समझ गये बात फिर बिगरने वाली है 

वो अंजन बन के आये पास और कहा कल ही जाना है वापस शहर गाँव से दूर आगे की पढाई करने मैं कुछ भी न कह पाया अगली सुबह ख़तम हो गयी फिर से वो पुरानी अधूरी कहानी 

 
Published
2017-03-11