लेश मात्र प्यार

  • एम. आर. अयंगर

Abstract

उन दिनों मेरा हाथ अपने हाथ में लिए,
गोदी में ले सहलाते – तुम 
और कभी तुम्हारा हाथ लिए ,
सहलाती – मैं,

कभी पार्क में, तो कभी सिनेमा हॉल में,
कभी नहर किनारे, तो कभी नदिया तीरे,
तब बातें कम ही होती थी ,
पर एक दूसरे के अहसासों का, 
अहसास हो ही जाता था.
Published
2015-07-17