महीप सिंह की कहानियों में मानवीय मूल्य
Abstract
मानवीय मूल्यों का धरातल संवेदना की उस केन्द्रीय भूत का हिस्सा होता है, जो विशाल भी हो सकता है और सीमित भी। इसी के आधार पर मानव के सम्बन्धों का आधार और आयाम भी बदलता रहता है। स्त्री- पुरुष के सम्बन्धों से लेकर परिवार, बृहत्तर मानवीय समाज के सम्बन्धों तक उसका विस्तार देखा जा सकता है। महीप सिंह की कहानियों में सम्बन्धों के आधार और परस्पर एक-दूसरे के प्रति टकराते हुए रिश्तों या सम्बन्धों के आयाम देखे जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने माना है कि संवेदना की अभिव्यंजना करने का मूल आधार मानवीय करुणा और सहानुभूति है। फिर वे अपनी कुछ कहानियों में धार्मिक परिस्थितियों के प्रति विद्रोहात्मक स्वर अपनाया है। इस प्रकार, महीप सिंह का नाम सचेतन कहानी के प्रवर्तकों में उल्लेखनीय है। उन्होंने भोगे हुए यथार्थ को अपनी कहानियों में व्यक्त किया है।



