भारतीय भाषाएँ : कल और आज

  • डॉ. एम. नारायण रेड्डी

Abstract

भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है। यहाँ लगभग साढ़े सोलह सौ भाषाएँ हैं जिन्हें चार अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया है। इनमें बाईस भाषाओं को संविधान से मान्यता प्राप्त है। इन भाषाओं में रचित साहित्य में देशकाल परक अंतर भी दृष्टिगोचर होता है।भारत में अंग्रेजों के आगमन के बाद, अंग्रेजी सरकार की आधिकारिक और उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा का माध्यमभी बन गई, और मातृभाषा या अंग्रेजी के उपयोग के बारे में भी बहुत-कुछ चर्चा हुई।उसके बाद गाँधी ने अंग्रेजी भाषा का विरोध किया और एक स्वदेशी भाषा को अपनाने पर जोर दिया।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343के अनुसार,संघ की आधिकारिक भाषा वर्तमान अंग्रेजी के बजाय देवनागरी लिपि में हिन्दी होगी। लेकिन देश में विभिन्न भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। फिर भी भाषाई विविधताओं के बावजूद एकीकरण की मजबूत ताकतें रही हैं, जिसमें प्रमुख भूमिका संस्कृत, फारसी और अंग्रेजी ने निभाई है। अनुसूचित भाषाएँभारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिलहैं, तथा गैर-अनुसूचित भाषाएँजो आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं हैं। इसके साथ-साथ भारत में लुप्तप्राय भाषाएँ भी हैं जिनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

शिक्षा नीति में बताया गया हैकि अध्ययन की जाने वाली पहली भाषा मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा होनी चाहिए। हिन्दी भाषी राज्यों में, दूसरी भाषा कोई अन्य आधुनिक भारतीय भाषा या अंग्रेजी होगी,और गैर-हिन्दी भाषी राज्यों में,दूसरी भाषा हिन्दी या अंग्रेजी होगी। फिर हिन्दी भाषी राज्यों में, तीसरी भाषा अंग्रेजी होगी या एक आधुनिक भारतीय भाषा होगी जिसका अध्ययन दूसरी भाषा के रूप में नहीं किया जाएगा, और गैर-हिन्दी भाषी राज्यों में, तीसरी भाषा अंग्रेजी होगी या एक आधुनिक भारतीय भाषा होगी जिसका अध्ययनदूसरी भाषा के रूप में नहीं किया जाएगा। यह सुझाव दिया गया था कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए और राज्य सरकारों को त्रि-भाषा सूत्र को अपनाना और सख्ती से लागू करना चाहिए, जिसमें एक आधुनिक भारतीय भाषा का अध्ययन शामिल है। इस प्रकार, भाषा शिक्षा एवं बहुभाषावाद से सम्बन्धित विवाद ब्रिटिश भारत में अंग्रेजी को लेकर और उसके बाद से अहिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी को लेकर चलते आये हैं।

Published
2022-03-18