उच्चतर माध्यमिक स्तर पर भौतिक विज्ञान शिक्षण.अधिगम में होनें वाली त्रुटियां
Abstract
वर्तमान युग मे विज्ञान का प्रभाव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हमें दिखायी देता है । आज विज्ञान के बिना समाज की कल्पना करना असंभव है। हमारी संस्कृति में विज्ञान घुल मिल गया है विज्ञान की शिक्षा के प्रचार एवं प्रसार से मानव की विचार धारा में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। इस परिवर्तन ने व्यक्ति की आर्थिक समाजिक एवं सांस्कृतिक स्थिति को भी प्रभावित किया है।विज्ञान एक ऐसा विषय है जिसमें तार्किक रूप से चिन्तन करने की आवश्यकता होती है इसमें कुछ विषय वस्तु ऐसी होती है जिसमे गणितीय योग्यता की ही आवश्यकता होती है बिना गणितीय योग्यता के उस विषय वस्तु को नही समझा जा सकता है लेकिन यहां पर यह समझना अत्यन्त आवश्यक है कि यदि छात्र भौतिकी के प्रश्नो को सूत्रों के आधार पर हल कर रहा है तो इसका तात्पर्य यह नहीं हो जाता कि छात्र भौतिकी के प्रत्ययों को समझ रहा है, हो सकता है उसका केवल गणितीय पक्ष मजबूत हो।उस छात्र की भौतिकी विषय की समझ अच्छी है यह हम विश्वास के साथ तब कह सकते हैं जब वह छात्र आलोचनात्मक आधार पर हल की जाने वाली विषयवस्तु की व्याख्या कर सके अर्थात स्मृति स्तर के साथ-साथ बोध स्तर एवं चिन्तन स्तर पर सामंजस्य स्थापित कर सके। इसके लिये आवश्यक है कि छात्रों की भौतिक विज्ञान विषय के प्रति रूचि के साथ-साथ भाषायी पकड भी अच्छी हो। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उच्चतर माध्यमिक स्तर पर भौतिक विज्ञान शिक्षण-अधिगम में होने वाली त्रुटियों का अध्ययन करना है। छात्र और छात्राओं के न्यादर्श का यादृच्छिक चयन उत्तराखण्ड़ के रूद्रप्रयाग जनपद के माध्यमिक विद्यालयों से किया गया है। प्रदत्त संकलन के लिये स्वनिर्मित प्रश्नावली का प्रयोग उपकरण के रूप में किया गया है। प्रदत्त विश्लेषण के लिये पद विश्लेषण नामक सांख्यिकी का प्रयोग किया गया है। अध्ययन के निष्कर्षो से पता चलता है कि उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थी प्रयोगात्मक कक्षाओं के अभाव में, विषय के प्रति भय का दृष्टिकोण, विषय की नीरसता, प्रत्यय पर कमजोर पकड,़ भाषायी योग्यता का अभाव, गणितीय योग्यता का अभाव, प्रायोगिक सामग्री का अभाव, पुनरावृत्ति का अभाव, आदि के चलते कठिन विन्दुओं पर अधिकाधिक त्रुटिंया करतें है।



