नवगीत के निराला कवि माहेश्वर तिवारी

  • डॉ. मंजू शुक्ला

Abstract

नवगीत विधा ने गीत को संरक्षण प्रदान करने के साथ आधुनिक युगबोध और शिल्प के सॉचे में ढालकर उसको मनमोहक रूपाकार प्रदान करने का काम किया है। समकालीन सामाजिकता एवं मनोवृत्तियों को लयात्मकता के साथ व्यक्त करती काव्य रचनायें नवगीत कहलाती है। नवगीत में गीत की अवधारणा कदापि निरस्त नहीं होती बल्कि यह कहना ठीक होगा कि गीत के ही पायदान पर नवगीत खड़ा हुआ है। जिसमें नया चिन्तन ,समाज का यथार्थ ,व्यंग्य का पैना तेवर अन्दर तक बेधने वाली झकझोरने वाली ताकत उपस्थित है।

Published
2021-12-22