नासिरा शर्मा के ‘पारिजात’ उपन्यास में सामाजिक बोध
Abstract
महिला कथाकारों में नासिरा शर्मा एक सशक्त हस्ताक्षर है जिनकी दृष्टि में परिपक्वता और लेखन में व्यापकता है। समाज में दैनिक जीवन की घटनाओं, घर-परिवार की विडम्बनाओं और नारी जीवन की पीड़ा के साथ-साथ अपने समय में व्याप्त विसंगतियों और कुरुपताओं को नासिरा शर्मा ने यथार्थता के साथ आंका और किसी विशेष में बंधकर नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व को केन्द्र में रखकर अभिव्यक्ति प्रदान की।



