प्रेम और स्वानुभूति के विलक्षण कवि घनानंद

  • डॉ. तृप्ता

Abstract

स्वच्छंद काव्यधारा में घनानंद का स्थान सर्वोपरि है। रीतिमुक्त प्रेममार्गी कवियों में इनकी गणना कनिष्ठका में होती है। घनानंद केकाव्य में ‘सुजान’के प्रति अनन्य प्रेमभाव को दर्शाया गया है। कवि ने अपनी स्वानुभूति तथा अपनी प्रेम की पीड़ा और प्रेममार्ग केबाँकेपन को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया है।

Published
2021-05-06