वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता विकास के अवसर एवं संभावनाएँ

  • डॉ. जी. एस चौहान
  • सेवन्ता मुवेल

Abstract

हमारी भारतीय सभ्यता को प्राचीन काल से चार वर्णो में बाँटा गया था, इनमें से केवल वैष्य ही व्यापार व्यवसाय करता था। उसे मालुम होता था कि उद्यम के समस्त कार्य व लाभ-हानि का जोखिम उसे हि उठाना है। आज समय बदल गया है, प्रतियोगिता के इस दौर में पुरानी सभी मान्यताएँ व अर्थ बदल गये है। आज प्रत्येक व्यक्ति इस दौड़ में षामिल हो रहा है। अब उत्पादन के साधनों को अलग-अलग जगह से एकत्रित करके उद्यम स्थापित करने वाले व्यक्ति को उद्यमी कहा जाता है। किसी भी देष का विकास वहाँ उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करता है। आज सम्पूर्ण विष्व में सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अनेक चुनौतियों, समस्याओं एवं संसाधनो के कठिन दौर से गुजर रहा है। भारत एक युवा देष है। यहाँ युवा जनषक्ति अन्य देषो की तुलना में अधिक है। कौषल एक ऐसा साधन है, जो देष के युवाओं को उत्पादक और सषक्त बनाने की क्षमता रखता है। जब हम कौषल विकास की बात करते है तो एक व्यक्ति नही बल्कि पुरे समाज को मजबूत बनाने की बात करते है। यह षक्तिकरण हमारे देष के नागरिको के लिये एक आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए अत्यंत आवष्यक है। श्रम आधारित अर्थव्यवस्था को कौषल-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना हमारा लक्ष्य है।

Published
2020-08-13