संवेदनशील समाज के निर्माण में भारतीय दर्शन का योगदान
Abstract
समाज का स्वरूप व्यक्ति पर निर्भर करता है। क्योंकि व्यक्ति ही समाज की ईकाई है। समाज के बारे में कहा जाता है- “समाज सामाजिक संबंधों का जाल है।’’ तात्पर्य यह है कि मनुष्य के स्वभाव और आचरण का प्रभाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समाज पर पड़ता है। प्रस्तुत शोध आलेख में दो महत्वपूर्ण प्रत्यय है-



