कृतिदेव यहां सर्वेश्वरदयाल सक्सेना और राजनीतिक चेतना

  • डॉ. संजय चावड़ा

Abstract

सर्वेश्वरदयाल की कविताओं व नाटकों में मानव जीवन का बहुरंगी यथार्थए राजनीतिक चहल.पहलए प्रकृति.प्रेम आदि का सहज भाषा में चित्रण हुआ है। उनकी कविताओं और नाटकों  को पढ़ना एक भरे.पूरे मनुष्य की दुनिया से गुज़रना है। एक तरफ जनता की निष्क्रियता के प्रति उनमें क्षोभ है तो दूसरी ओर उनकी शक्ति में उन्हें गहरी आस्था है। ऐसी अनेकों कविताएं और नाटक सर्वेश्वर ने लिखे हैंए जिनमें वे जनता की सामूहिक शक्ति को जगाने का प्रयास करते हैं। वे आलोचनात्मक विवेक संपन्न कवि थे। ष्देशगानष् और ष्कालाधनष् जैसी कविताएं और श्बकरीश् जैसा नाटक उन्हीं के जैसा व्यक्ति लिख सकता था। वह श्दिनमानश् पत्रिका से जुड़े एक महत्त्वपूर्ण पत्रकार थे। उनका श्चरचे और चरखेश् स्तंभ श्दिनमानश् की पहचान रहा। उनकी पत्रकारिता साहसपूर्ण पत्रकारिता का श्रेष्ठ उदाहरण है। उनकी रचना ष्देशगानष् इसी साहसिकता का परिचय देती है।

Published
2020-08-11