आज यहाँ कोई नहीं

  • मुकेश नेगी

Abstract

आज यहाँ
कोई नहीं
तलाश है फिर
वहीँ खड़ा रहूँ

कोई जुस्तजू करे
या न करे
फ़रिश्ते कोई मिल जाये तो
ही अच्छा हो जाये
Published
2015-08-19