हिंदी नवजागरण की रूपरेखा

  • नीरजा सिंह

Abstract

19वीं शताब्दी में सम्पूर्ण भारत में जिस नवीन चेतना का प्रचार-प्रसार हुआ, उसे कई नामों से पुकारा गया। रेनसा, पुनर्जागरण, पुनरुत्थान, प्रबोधन, नवोत्थान, नवजागरण तथा समाजसुधार इत्यादि। कई नामों से अभिहित किए जाने वाले इस दौर का क्या नाम दिया जाय, यह विद्वानों के बीच विवाद का विषय रहा है। सबसे पहले ’रेनेसाँ’ के स्थानापन्न के रुप में हिन्दी पुनर्जागरण शब्द का प्रयोग होने लगा। डॉ. लक्ष्मी सागर वार्ष्णेव ने इस युग को ’नवोत्थान’ का नाम दिया।1 जबकि रामधारी सिंह दिनकर ने इसके लिए ’पुनरुत्थान’ शब्द का प्रयोग उचित समझा।2 लेकिन हिन्दी में अब इस युग के लिए ’नवजागरण’ शब्द का प्रयोग अधिक से अधिक किया जाने लगा है। इस शब्द का प्रयोग पहली बार डॉ. रामविलास शर्मा ने किया। उन्होंने ’महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिन्दी नवजागरण’ (1977) नामक पुस्तक के द्वारा न केवल नवजागरण बल्कि हिन्दी नवजागरण की भी संकल्पना प्रस्तुत की।3 इसके पूर्व बंगला के पुनर्जागरण या नवजागरण की ही चर्चा होती थी।

Published
2015-09-16