ह िंदी भाषा के हिकास में अमीर खुशरो का योगदान

  • Ms सुनीता

Abstract

ह िंदी भाषा के हिकास में अमीर खुशरो खड़ी बोली के प ले प्रमुख कहि माने जाते  ैं। िे १४िीिं शताब्दी के  आरम्भ में ठीक उस भाषा का प्रयोग कर र े र्थे जैसी खड़ी बोली आधुहनक काल में हदखती  ै। डॉ० रामकु मार ‘ह िंदी साह त्य का आलोचनात्मक इहत ास में हलखते  ैं हक अमीर खुसरो जन साधारण की भाषा खड़ी बोली को साह त्यत्यक रूप देने में सबसे प ले सफल हुए। प्रात्यम्भक ह िंदी को खुशरो ने 'ह िंदिी’ नाम हदया। इस शब्द का प्रयोग उन्ोनिंे उत्तर भारत में प्रचहलत आम भाषा के हलए हकया र्था। खुशरो ने हदल्ली के आसपास की हजस हिकहसत भाषा को 'दे िली' क ा, ि  िस्तुत:ह िंदिी या ह िंदी  ी र्थी। ह न्दी भाषा से उनका ग रा लगाि र्था। र्थे। िे अपनी फारसी रचना 'गुरितुल कमाल' की भूहमका में हलखते  ैं- चूिं गन तूती ए ह न्दम अजरासत पुसी। जगन ह न्दिी पुसि ता नग्ज गोयम॥ अर्थाित् स ी पूछो तो मैं ह न्दी का तोता  ँ। यहद तुम मुझसे मीठी बातें करना चा ते  ो तो ह न्दिी में बातें करो। अमीर खुसरो के नाम से ह न्दी साह त्य में अनेक प ेहलयािं, क मुकररयाँ, दो े, गीत और कव्वाली आहद प्रचहलत  ैं। उनमें भी क ीिं-क ीिं ब्रजभाषा की झलक  ै, पर गीतोिं और दो ोिं की भाषा ब्रज या मुख प्रचहलत काव्यभाषा  ी  ै।
Published
2015-12-16