जो हो न अपना उसे देख मन क्यों पागल
Abstract
ये शहर है या कोई ख्यालों का जंगलहर गुलाब काँटों पे खिलता है
ऐसी मर्यादा में घिरता है
लुट रहा जग कितने सपने
गढ़ रहा कई झूठें अफसाने
व्यंग बाण लगता है, दिल होता है घायल
जो हो न...
प्रीत के लिए नित तरसे मन
सावन की तरह बरसे नयन
जब तक है ये तन मन यौवन
'साहिल' लाखों है अपने सजन
जाने क्यों देख उसे बजे मेरे पायल
जो हो न...
सजाया रूप और किया सिंगर
जाने किसका है अब इंतजार
हर शख्स लगता हुस्न का सौदागर
झूठें सब्द बन गए इश्क-मुहब्बत-प्यार
जी करे जब मन कर लेना मेरा नंबर डायल
जो हो न...



