जीने की तमन्ना है

  • शुभाना श्री

Abstract

जीने की तमन्ना है 

जीना चाहता हूँ 

एक दो पल 

हँसना चाहता हूँ 

हंसीं ओठों से निकले 

या दिल से आये 

ये तय होता ही नहीं 

किसी को देखने से 

हंसी चेहरे पे आये सही 

ये होता है कभी कभी 

भला हम कैसे रहे 

दिल की बात कहे 

जब दिल से खुश होता हूँ 

कोई सामने हॉट ही नहीं 

ये बात तो दिल की रही 

भला हम उनकी क्या कहे 

खूब आता ही उन्हें 

रुलाकर हँसाना 

रूठ जाने पे मानना 

किसी ने ठीक कहा है

चूहे को मरकर गोबर सुंघाना

मरे घोरे को घास खिलाना 

अजब है जिन्दगी का फ़साना 

किसे कहे हम आपना

किसे कहे बेगाना 

पर 

जीने की तमन्ना है 

जीना चाहता हूँ 

एक दो पल 

हँसना चाहता हूँ 
Published
2015-11-13