ये अश्लील है
Abstract
ये अश्लील है, है अर्धनंग तो आप क्यों हो रहे है दंग आई है सिनेमा में अश्लीलता की बाढ़ तो ज्यादा है आँखें कीजिये बंद शर्म का चादर ओढ़ लीजिये हो रहा है उसे होने दीजिये यह पश्चमी सभ्यता का नही भारतीय दर्शन का है देन समय परिवर्तनशील है इसे बदल जाने दीजिये
क्या याद नहीं हमारें पूर्वज रहते थे नंगा इन्हें भी हो जाने दीजिये नंगा
इसे समाज का पतन नहीं युग परिवर्तन कहा कीजिये ‘साहिल’ का कहना मानिये जो हो रहा है उसे होने दीजिये हमें एक बार फिर आदि मानव बन जाने दीजिये तभी आएगी सच्ची क्रांति मानव को मिलेगी शांति



