आँखों का पानी पुराना हो गया

  • आयुष आश्विन

Abstract

दिल जब अपना आशिकाना हो गया 

शहर कितना सुहाना हो गया 
डरता है अँधेरा हर घड़ी 
दीया देखें जमाना हो गया 
चाहत में बह गए हम तो 
आंसू तो बहाना हो गया 
खामोश दिल की धरकन मेरी 
हवाओं का निशाना हो गया 
उन्हें मनाने के लिए साहिल’ 
कोई नया तरीका इजादकर 
आँखों का पानी पुराना हो गया 

Published
2016-04-20