आज महज एक नारी हूँ मैं

  • आरती

Abstract

ना मैं जनक नंदनी सीता 

ना रधुवंश की कुलवधू

ना प्रभु श्रीराम की भार्या

और ना लव कुश की जननी 

आज महज एक नारी हूँ मैं 

अपने अस्तित्व को तलाशती

अर्थहीन जीवन को नए अर्थ देती 

आज महज एक नारी हूँ मैं 

Published
2017-06-16