किसने है ख्वाबों को पकरा

  • अरुण कुमार शर्मा

Abstract

किसने है ख्वाबों को पकरा

मन  के पंछी को न कोई पिजरा 

ख्यालों के उन्मुक्त गगन में 

इस छोटे से जीवन में 

कितने ख्वाब मन बुन रहा है 

कितने प्रीतम मन चुन रहा है 

तक रहा चकोर मन चाँद की रह 

Published
2017-06-14