क्या येही कम आस है

  • अरुण कुमार शर्मा

Abstract

दूर जाकर आ जाती पास

मुझे हॉट पल पल एहसास
लोगों को क्या समझाए
जब न समझाता है खुदा
लोगों से क्या करे आशा
जब खुदा ने ही किया निराश
बार बार जगती है प्यास
पर देख कर चारो ओर रेगिस्तान
मुझे मिलता है दिलशा
अरे केवल मई ही नहीं प्यासा
जग में बहुत है ऐसे
जो उम्र भर रह जाते प्यासे
तू तो साहिल है
सारा समंदर तेरे पास है
क्या येही कम आस है

Published
2017-06-13