कोई दिल की साज बजाएं तन्हाई में

  • शिवाय श्रेष्ठ

Abstract

कोई दिल की साज बजाएं तन्हाई में

कोई नगमा वफ़ा का गए तन्हाई में

शर्द हो गयी है फिजां की हवाएं

कोई गर्मी-ए-एहसास लाये तन्हाई में

चाँद सितारें चमक रहे है

कोई नया अरमान जगाये तन्हाई में

बेचैन है हम चैन नहीं

कोई पास बुलाएँ तन्हाई में

लहरें मचल रही है कब से

गुनगुनाये ‘साहिल’ भी कभी तन्हाई में

कोई दिल की साज बजाएं तन्हाई में

 

 
Published
2017-06-13