तेरी पलकें झुकी झुकी जो उठती है
Abstract
कोई जादू सा असर हमपे करती है
क्या बताएं तू कैसी लगती है
जान तू जानशीन लगती है
तेरी बातों में न जाने कैसा जादू है
मेरी दिल को तेरी ही आरजू है
तेरी तिरछी झुकी नजरों का समां है
तेरी मदभरी ओठें जाम छलकती है
कोई जादू सा...



