तेरी पलकें झुकी झुकी जो उठती है

  • आयुष आश्विन

Abstract

कोई जादू सा असर हमपे करती है 

क्या बताएं तू कैसी लगती है
जान तू जानशीन लगती है
तेरी बातों में न जाने कैसा जादू है
मेरी दिल को तेरी ही आरजू है
तेरी तिरछी झुकी नजरों का समां है 
तेरी मदभरी ओठें जाम छलकती है 
कोई जादू सा...

Published
2017-07-14