ज्यों पतझड़ का मौसम

  • हिमांशु हंसराज

Abstract

न कर उदास मन को

जी भर के जी जीवन को
गम का मौसम क्षणिक है
ज्यों पतझड़ का मौसम
न हो हतास न हो उदास
बरसेगी मेघा बुझेगी प्यास
सूरज की गर्मी का कहर क्षणिक है

Published
2017-07-16