हम जख्म काँटों की क्या गिनवाएं

  • राजकुमार शर्मा

Abstract

हम जख्म काँटों की क्या गिनवाएं

हमने तो चोट फूलों से खाए
हवा के झोकों ने है लुटा
और ललचाया है कलि घटा
Published
2017-08-14