याद करके खवाबों में बुलाया न करो

  • सरीता देवी

Abstract

याद करके खवाबों में बुलाया न करो 

रेत पर  लिख  के  मेरा  नाम  मिटाया    करो 

आँखें  सच  बोलती  हैं , प्यार  छुपाया  न  करो

जो बात दिल में हो सुए जुबान पे लाया करो 

ये मुमकिन है कि जो नजरों से दूर हो 

हालात से मजबूर हो या मगरूर हो 

मन के दरीचों को खुला रखो यु दीवारे न बनाया करो 

दिल के आएने में झांक कर देखो  

Published
2017-09-16