उचें ऊँचें पर्वत व् पहाड़

  • उमेश शर्मा

Abstract

उचें ऊँचें पर्वत व् पहाड़ 

छू रहे गगन को 

उनकी आकृति प्रकृति 

ललचा  रही मन को 

ऊँचें नीचें रास्तों से 

जा रहा  हु मिलने 

उन पर्वतों से 

जो होकर निर्भीक रोके

Published
2017-09-11