बनाना है तो फूल बनो

  • उमेश कुमार

Abstract

बनाना है तो फूल बनो 
काँटों से भी दोस्ती करो 
आपनी खुसबू बिखराओ
ऐसा हैस्मुख बन जाओ 
डाल-डाल पात-पात 
से करो तुम दोस्ती 
इस वन में इस चमन में 
तुम करते रहो मस्ती 
जो तुम्हे मशाल दे 
उसको भी तुम महकाओ 
अहिंसा की पाठ पुरानी
मन से निकालो सैतानी 
तुम जहा जाओ खुशियाँ लाओ 
बनाना है तो फूल बनो 

Published
2017-10-16