नहीं अब अमन चैन

  • आयुष आश्विन

Abstract

नहीं अब अमन चैन 
दिल को जो दे आराम 
मिलते नहीं अब वे नैन 
न जाने कब उठा ले जाये 
पहचानेगा कौन 
गोली मारो या गाली दो 
अब लोग रहते हैं मौन 
मम्मी पापा न से बहार जाने दे 
बाहर घुमने पर लगा हैं बैन 
हम रो रहे हैं हमें रोने दो 
अब उन्हें मिले चैन 
फिर आयेंगे कर गए वादें 
सब हैं बेचैन   
Published
2017-10-14